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नीट 2025 में बेंगाबाद क़े लकठाही गांव के शुभम कुमार ने हासिल की ऐतिहासिक सफलता, ऑल इंडिया रैंक 4778

शुभम कुमार का सपना है एक कुशल और संवेदनशील डॉक्टर बनना। उनका कहना है, "मेरा उद्देश्य है कि मैं एक जिम्मेदार डॉक्टर बनकर गरीब और वंचित लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकूं। डॉक्टर बनना मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है।"

बेंगाबाद (14 जून 2025):

संवाददाता:मुकेश कु. वर्मा

गिरिडीह जिले के बेंगाबाद प्रखंड अंतर्गत मोतीलेदा पंचायत स्थित छोटे से गांव लकठाही के होनहार छात्र शुभम कुमार ने नीट 2025 (NEET 2025) की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक 4778 प्राप्त की है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित इस प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा का परिणाम 14 जून को जारी किया गया, जिसमें शुभम की इस उपलब्धि ने पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व की लहर दौड़ा दी है।

 

किसान परिवार से निकलकर मेडिकल की राह तक का सफर

शुभम कुमार एक सामान्य किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता श्री दुलार कुमार स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश में रहकर भी शुभम ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर यह उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। शुभम की मेहनत और लगन इस बात का प्रमाण हैं कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, संकल्प और समर्पण से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

 

परिवार, गांव और क्षेत्र का नाम रोशन

 

शुभम की सफलता से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा लकठाही गांव, मोतीलेदा पंचायत और बेंगाबाद प्रखंड गौरवांवित है। गांव में जश्न का माहौल है, लोगों ने मिठाइयां बांटी और एक-दूसरे को बधाइयाँ दीं। जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और समाजसेवियों ने शुभम को उनके घर जाकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

 

डॉक्टर बनने का सपना, समाज सेवा का संकल्प

 

शुभम कुमार का सपना है एक कुशल और संवेदनशील डॉक्टर बनना। उनका कहना है, “मेरा उद्देश्य है कि मैं एक जिम्मेदार डॉक्टर बनकर गरीब और वंचित लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकूं। डॉक्टर बनना मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है।”

 

शुभम का यह दृष्टिकोण न केवल उन्हें एक उत्कृष्ट छात्र के रूप में प्रस्तुत करता है, बल्कि उनकी सामाजिक चेतना और सेवा भावना को भी दर्शाता है।

 

युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत

 

शुभम की यह उपलब्धि उन सैकड़ों ग्रामीण छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अगर नीयत साफ हो, मेहनत ईमानदार हो और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।

संक्षेप में, शुभम कुमार की सफलता केवल एक परीक्षा में उच्च स्थान प्राप्त करना नहीं है, बल्कि यह उस जज्बे और संघर्ष की कहानी है, जो हर उस युवा को प्रेरणा देती है जो अपने हालातों से लड़कर आगे बढ़ना चाहता है।

 

शुभम को हार्दिक शुभकामनाएं – आपके सपनों की उड़ान यूं ही ऊँचाइयों तक पहुंचे!

 

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