
गिरिडीह जिले के जमुआ थाना क्षेत्र में ज़मीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया है। पुश्तैनी जमीन पर कब्ज़े की कोशिश का विरोध करने पहुँचे परिवार पर बेरहमी से हमला हुआ, जिसमें महिलाओं और बच्चों को गंभीर चोटें आईं।
हमला कैसे हुआ ?
17 सितंबर की शाम अम्बिका प्रसाद राम और उनके परिजनों को पता चला कि उनकी जमीन पर विश्वकर्मा पूजा के नाम पर पंडाल और झोपड़ी बनाई जा रही है। जब परिवार विरोध करने पहुँचा तो हथियारबंद लोग पहले से मौजूद थे।

परिवार के अनुसार—
महिलाओं को पीटा गया
चाकू से हमला किया गया
गहने छीने गए
छेड़छाड़ की गई
हमलावरों ने यह भी धमकी दी कि “अकेले कहीं मिले तो जान से मार देंगे।”
बार-बार किया आवेदन
पीड़ित परिवार का कहना है कि जमीन पर कब्ज़े की यह कोशिश नई नहीं है। पहले भी कई बार ऐसा हुआ है।
26 सितंबर 2025 को उन्होंने उपायुक्त गिरिडीह और D.S.P कौशल अली को लिखित आवेदन दिया।
इससे पहले भी थाना स्तर पर और अंचल अधिकारी को कई बार शिकायत की गई थी।
परिवार का आरोप है कि लगातार आवेदन देने के बावजूद अब तक न तो उनकी जमीन से टेंट और बस हटाई गई है और न ही हमलावरों पर कोई कार्रवाई हुई है।

प्रशासन पर सवाल
पीड़ितों का कहना है कि मामला कई बार सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर भी सामने आ चुका है। इसके बावजूद जिला प्रशासन की चुप्पी यह दिखाती है कि स्थानीय स्तर पर भूमि माफियाओं का दबदबा बढ़ चुका है।

ग्राउंड रिपोर्ट
नंबर वन न्यूज़ चैनल की टीम जब मौके पर पहुँची तो वहाँ घायल महिलाएँ और डरे-सहमे बच्चे दिखाई दिए। उनकी आँखों में सिर्फ एक सवाल था –
👉 “क्या हमें कभी न्याय मिलेगा ?”
दूसरी ओर
हमलावर पक्ष से संपर्क नहीं हो सका। यदि उनका बयान आता है तो चैनल निष्पक्षता के साथ उसे भी प्रकाशित करेगा।
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👉 यह घटना प्रशासन की लापरवाही और पीड़ित परिवार की बेबसी की गवाही देती है। सवाल साफ है – जब आवेदन बार-बार दिए जा रहे हैं और मीडिया में मामला उजागर हो चुका है, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही ?




