खरगडीहा में मां दुर्गा की भव्य पूजा, 59 वर्षों से निभाई जा रही परंपरा..

वैष्णवी पद्धति से होती है पूजा – बिना बली का विधान
खरगडीहा / जमुआ : जमुआ प्रखंड अंतर्गत खरगडीहा गांव में नवरात्रि एवं दुर्गा पूजा का आयोजन इस बार भी पूरी भव्यता के साथ किया जा रहा है। यहां की सबसे खास बात यह है कि पिछले 59 वर्षों से पूरी तरह वैष्णवी पद्धति से बिना बली के पूजा-अर्चना की जाती है।
मुख्य आचार्य के रूप में रविंद्र पाठक और पुजारी आनंद कुमार पूरे श्रद्धा भाव से पूजा का संचालन करते हैं, वहीं सालाना पुजारी के तौर पर गुड्डू मिश्रा भी उपस्थित रहते हैं।

ऐतिहासिक महत्व
खरगडीहा गांव का ऐतिहासिक दृष्टि से भी विशेष महत्व है। यह स्थान कभी परगना हुआ करता था। यहां स्थित लंग़टा बाबा का समाधि स्थल काफी प्रसिद्ध है। पुराने समय में लोग बैलगाड़ियों से चलकर यहां दुर्गा पूजा और मेला देखने पहुंचते थे।
स्थापना और परंपरा
खरगडीहा दुर्गा मंदिर की स्थापना वर्ष 1966 ईस्वी में हुई थी। तभी से यहां निरंतर वैष्णवी पद्धति से दुर्गा पूजा हो रही है। पूजा का आरंभ कलशस्थापन से होता है और विजयदशमी तक प्रतिदिन भक्ति कार्यक्रम और रात्रिकालीन प्रवचन आयोजित किए जाते हैं।

सांस्कृतिक आयोजन
पूजा के साथ-साथ यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी धूम रहती है। सप्तमी के दिन डांडिया नृत्य का आयोजन किया गया। वहीं अष्टमी, नवमी और विजयदशमी पर भी विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाती हैं। स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं।
गौरतलब है कि यहां प्रतिमा विसर्जन विजयदशमी के दूसरे दिन किया जाता है।
सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति
पूरे आयोजन की देखरेख सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति करती है। समिति के पदाधिकारी इस प्रकार हैं—
अध्यक्ष – सत्यनारायण प्रसाद साहू
सचिव – रविंद्र साव
कोषाध्यक्ष – सुंदर राम भदानी
उपाध्यक्ष – रविकांत भदानी
मीडिया प्रभारी – अनूप राम, आशीष भदानी
उप सचिव – अनूप कुमार साहू
उप कोषाध्यक्ष – दयानंद प्रसाद साहू

इसके अतिरिक्त संतोष कुमार, सुमित कुमार (किट्टू), सूरज साव (पिंटू), रंजीत कुमार साव, मनीष कुमार साव, अशोक भदानी, राहुल साव, नंदकिशोर साहू, पप्पू साहू, रामेश्वर ठाकुर, जय प्रकाश साव, बालगोविंद साव, रूपेश साव, रॉकी साव, श्याम कुमार साव, आशीष सुमन, शुभम गुप्ता, टिंकू भदानी, प्रदीप साव, राजीव साव, राजेंद्र साव, राहुल कुमार समेत कई सदस्य सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर 22 सितंबर से शुरू हुआ यह आयोजन 2 अक्टूबर तक चलेगा। खरगडीहा का यह दुर्गा पूजा उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता का भी संदेश देता है।




