
गिरिडीह सदर प्रखंड के लेदा लालपुर और सरकबाद इलाके में इन दिनों अवैध आरा मिलों का कारोबार खुलेआम चल रहा है। बिना किसी लाइसेंस और सरकारी अनुमति के लकड़ियों की कटाई और मशीनों से चिराई की जा रही है। यह सब काम बाउंड्री के अंदर छुपाकर किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय लोग बताते हैं कि यह कोई नया नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा धंधा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, जब लोगों ने आरा मिल संचालकों से कागजात मांगे, तो वे कोई प्रमाण नहीं दिखा सके। इसके बावजूद लकड़ी आने-जाने और कटाई का काम बिना रोक-टोक जारी है। इससे यह साफ दिखता है कि प्रशासन या तो अनजान है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है।
❗ कानून का खुला उल्लंघन
वन अधिनियम के अनुसार, बिना लाइसेंस आरा मिल चलाना एक दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में मशीन जब्त करने से लेकर जेल तक की कार्रवाई हो सकती है। इसके बावजूद क्षेत्र में जंगल की लकड़ियां काटी जा रही हैं, जिससे पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान हो रहा है।
🌳 पर्यावरण पर खतरा
लगातार कटाई से जंगल कम हो रहे हैं, जिससे वन्य जीवों और प्राकृतिक संतुलन पर असर पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो जंगल पूरी तरह खत्म हो जाएंगे।
🙏 ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि:
* अवैध आरा मिलों पर छापेमारी की जाए
* दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो
* जंगल सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ाई जाए
👉 अब जरूरत है कि प्रशासन इस पूरे मामले की जांच करे और अवैध आरा मिलों को बंद करवाकर सख्त कदम उठाए, ताकि जंगल और कानून दोनों की रक्षा हो सके।




