पत्रकार से मारपीट–दुर्व्यवहार मामला: कानून जागा, खाकी झुकी हंसडीहा थानेदार निलंबित, प्रशासन ने दिखाई “देरी से सही, पर सख्ती”

हंसडीहा थानेदार निलंबित, प्रशासन ने दिखाई “देरी से सही, पर सख्ती”
दुमका।
आख़िरकार वह दिन आ ही गया जब खाकी को यह याद दिलाया गया कि कानून आम जनता और पत्रकारों के लिए भी है, सिर्फ़ वर्दीधारियों की ढाल नहीं। पत्रकार मृत्युंजय पांडेय के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के गंभीर मामले में दुमका एसपी पितांबर सिंह खेरवार ने हंसडीहा थाना के तत्कालीन प्रभारी ताराचंद्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की गई—जिसे लोग “देर से आया, मगर दुरुस्त” फैसला कह रहे हैं। निलंबन आदेश के साथ ही हंसडीहा थाना की कमान अब जिम्मी हांसदा को सौंपी गई है, जिन्हें नया थाना प्रभारी नियुक्त किया गया है।
बताया जाता है कि पत्रकार मृत्युंजय पांडेय ने ड्यूटी के दौरान थाना प्रभारी ताराचंद्र पर न सिर्फ़ अभद्र व्यवहार, बल्कि मारपीट जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। मामला सामने आते ही जिले भर के पत्रकार संगठनों में आक्रोश फैल गया और एक स्वर में यह सवाल उठाया गया—
“अगर सच दिखाना अपराध है, तो फिर लोकतंत्र किस काम का?”
लगातार बढ़ते दबाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन को आखिरकार यह स्वीकार करना पड़ा कि वर्दी भी कानून से ऊपर नहीं है। निलंबन की कार्रवाई से यह संदेश ज़रूर गया है कि पत्रकारों की आवाज़ को दबाने की कोशिश अब आसान नहीं होगी।
इस फैसले से जिले के पत्रकारों में संतोष देखा जा रहा है। इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकार सुरक्षा की दिशा में एक अहम, भले ही देर से उठाया गया, कदम माना जा रहा है।
प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि मामले की आगे जांच जारी रहेगी और यदि दोष सिद्ध होता है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह है कि यह सख्ती सिर्फ़ एक उदाहरण बनकर रह जाती है या सच में सिस्टम में सुधार की शुरुआत साबित होती है।




