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देवरी प्रखंड अंचल कार्यालय: “कक्ष बंद, जनता त्रस्त”

यह पहली बार नहीं है। हकीकत यह है कि सप्ताह में कई बार ऐसा होता है जब सभी जिम्मेदार अधिकारी अपने-अपने कक्ष से “गायब” रहते हैं। मानो देवरी प्रखंड कार्यालय एक सरकारी संस्था नहीं बल्कि “लुका-छिपी प्रतियोगिता का मैदान” हो।

रिपोर्ट – No1 News झारखंड बिहार

गिरिडीह जिला अंतर्गत देवरी प्रखंड अंचल कार्यालय का हाल इन दिनों बेहद निराला है। यहाँ “जनसेवा” का नाम तो है, लेकिन सेवा की जगह अक्सर ताला ही मिलता है।

20 अगस्त को जब No1 News झारखंड बिहार का संवाददाता वास्तविक हाल जानने पहुँचा, तो नज़ारा कुछ यूँ था—

👉 अंचल अधिकारी का कक्ष बंद।

👉 अंचल निरीक्षक का कक्ष बंद।

👉 अंचल नज़रत का कक्ष बंद।

👉 और तो और, कम्प्यूटर कक्ष भी बंद।

यानी पूरा अंचल कार्यालय “जनसेवा” की जगह “ताला सेवा” का पोस्टर बन चुका था।

 

वहाँ मौजूद अन्य अधिकारियों से पूछने पर पता चला कि “साहब डेरा में हैं, आएंगे या नहीं, यह कहना मुश्किल है।”

सवाल उठता है— अगर “साहब” को ही नहीं मालूम कि वे आएंगे या नहीं, तो बेचारे आम जनता को क्या पता होगा?

गरीब और ज़रूरतमंद लोग जो अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढने यहाँ आते हैं, वे चक्कर काटते रहते हैं।

पर उन्हें मिलता है— “ताला दर्शन”।

 

स्थानीय लोगों से बातचीत करने पर खुलासा हुआ कि यह पहली बार नहीं है। हकीकत यह है कि सप्ताह में कई बार ऐसा होता है जब सभी जिम्मेदार अधिकारी अपने-अपने कक्ष से “गायब” रहते हैं। मानो देवरी प्रखंड कार्यालय एक सरकारी संस्था नहीं बल्कि “लुका-छिपी प्रतियोगिता का मैदान” हो।

जनता पूछ रही है—

👉 क्या दफ्तर जनता के लिए खुलता है या सिर्फ कुर्सी और पंखे के लिए?

👉 क्या प्रखंड कार्यालय का नया नाम “ताला सेवा केंद्र” रख देना चाहिए?

“देवरी प्रखंड अंचल कार्यालय में अधिकारी मिलें या न मिलें,

लेकिन ताले की हाज़िरी हमेशा 100% रहती है।”

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